उत्तर प्रदेश निर्मित मदिरा: निर्यात की अपार सम्भावना और उज्ज्वल भविष्य

उत्तर प्रदेश डिस्टलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बिजनेस हेड एस के शुक्ल ने कहा की उत्तर प्रदेश आज देश के मदिरा उद्योग में नया इतिहास रच रहा है। हाल ही में 9 जुलाई 2025 को लखनऊ में आयोजित प्रथम आबकारी इन्वेस्टर्स समिट ने इस उद्योग को नई दिशा और गति प्रदान की है। इस आयोजन में ₹39,479 करोड़ के 135 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिससे 73,524 से अधिक रोजगार सृजित होंगे, साथ ही ₹4,320 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। एस के शुक्ल द्वारा उत्तर प्रदेश के आसवनियों के लिए सदैव सहयोग और विकास की भावना से कार्य करते है। इनके नेतृत्व प्रत्येक वर्ष अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी कराया जाता है।
राज्य में मदिरा उत्पादन क्षमता बीते वर्षों में दोगुनी से अधिक हुई है। वर्ष 2017–18 में 61 डिस्टिलरी थीं जिनकी क्षमता 170 बिलियन लीटर थी, जो 2022–23 तक बढ़कर 85 डिस्टिलरी और 348 बिलियन लीटर हो गई। सिर्फ एक वर्ष में 18 नई डिस्टिलरी स्थापित हुईं और 20 और विकासाधीन हैं।
निर्यात के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2017–18 में 292 मिलियन लीटर से बढ़कर 2022–23 में निर्यात 743 मिलियन लीटर पहुँच गया, यानी 155% की वृद्धि। अब प्रदेश से लगभग 38 देशों को शराब निर्यात हो रही है। उद्योग का अनुमान है कि वर्ष 2025–26 तक यह निर्यात 1,000 मिलियन लीटर से अधिक हो सकता है।
इस सफलता के पीछे नीति-सुधारों की बड़ी भूमिका रही है। ई-गवर्नेंस, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और ENA पर निर्यात शुल्क घटाकर ₹3 से ₹2 प्रति लीटर करना निवेशकों और उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन साबित हुआ है।
APEDA और यूपी डिस्टिलरी एसोसिएशन निर्यात को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने और “Made in UP” ब्रांड को सशक्त करने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश निर्मित मदिरा न केवल बिहार की सीमा, बल्कि यूरोप, उत्तर अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका तक अपनी पहचान बनाएगी।
यह कहानी केवल उद्योग की नहीं, बल्कि प्रदेश की कृषि, रोजगार, निवेश और वैश्विक पहचान को नई ऊँचाई देने की है। उत्तर प्रदेश अब विश्व बाजार में अपनी आत्मा और शक्ति का परचम लहराने को तैयार है।