इंदौर: सैटेलाइट हिल्स में भूमाफिया चंपू ने की धोखाधड़ी

डे नाईट न्यूज़  हाईकोर्ट इंदौर द्वारा रिटायर न्यायमूर्ति आईएएस श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने सैटेलाइट हिल्स की शिकायतों पर सुनवाई हुई। इस दौरान पीडि़तों ने धोखाधड़ी के लिए लगातार भूमाफिया चंपू अजमेरा का ही नाम लिया। हाई कोर्ट परिसर में कमेटी के समक्ष मंगलवार को 50 से ज्यादा पीडि़त उपस्थित हुए थे। सभी के आवेदनों में चंपू द्वारा धोखाधड़ी करने की बात लिखित में कही। कई आवेदनों ने चंपू की पत्नी योगिता अजमेरा को भी सह आरोपी बताया गया।

हाई पॉवर कमेटी 24 व 25 मई दो दिन सुनवाई नहीं करेगी। मंगलवार को कमेटी की सुनवाई में जानकारी दी गई कि सभी को 26 मई को बुलाया गया है। सुनवाई में कालिंदी गोल्ड, फिनिक्स कॉलोनी के पीडि़त भी पहुंचे थे। वहां सभी से सूचना पत्र पर हस्ताक्षर लिए गए और सभी को 26 मई को आने के लिए कहा गया है। जब प्रशासन की कमेटी ने सुनवाई की थी तब कुल 71 शिकायतें आई थी। उनमें 49 रजिस्ट्री धारक और 22 रसीद पर सौदे करने वाले थे। इसमें से केवल रजिस्ट्रीधारक वाले 27 केस निपटे थे। हाईकोर्ट की गठित कमेटी के समक्ष सोमवार को 21 शिकायतें पहुंची तो मंगलवार को 50 पीडि़तों ने शिकायत दर्ज कराई। इस कॉलोनी मेंसबसे बड़ा मुद्दा जमीन के स्वामित्व का ही है। इसलिए कि एक और कॉलोनी के पुराने मालिक कैलाश गर्ग ने बैंकों से करोड़ों का कर्जा उठा रखा है।

इसमें कुछ किसानों को जमीन भी नक्शे में शामिल है, जिसका सौदा पूरा हुआ ही नहीं है। कुछ लोगों ने टीएंडसीपी से नक्शा ही किसानों के गलत हस्ताक्षर के जरिए पास करा लिया। ऐसे में कमेटी पीडि़तों को कब्जा देने का भी बोलती है तो भी स्वामित्व का विचार बना रहेगा। सैटेलाइट कॉलोनी से नारायण अंबिका इनफ्रास्ट्रक्चर प्रालि कंपनी के डायरेक्टर चंपू अजमेरा, योगिता अजमेरा, भगवानदास होतवानी, रश्मि पिता कैलाशचंद गर्ग, एवलांच रियलिटी प्रालि. महेश वाधवानी पिता टेकचंद वाधवानी और कैलाशचंद गर्ग पिता बाबूलाल गर्ग सभी जुड़े रहे हैं।

सैटेलाइट कॉलोनी साल 2008 में लांच हुई जो एवलांच कंपनी ने लांच की थी। कंपनी में कैलाश गर्ग और सुरेश गर्ग, फिर प्रेमलता गर्ग व भगवानदास होतवानी आ गए। गर्ग ने बैंक में जमीन का कुछ हिस्सा गिरवी रखकर 110 करोड़ का लोन ले लिया। कंपनी ने दस अप्रैल 2008 को प्रस्ताव पास कर चंपू को डेवलपर्स बना दिया और सौदे करने के लिए पॉवर दे दी। नारायण एंड अंबिका साल्वेक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी बनी जिसमें चंपू और उनकी पत्नी योगिता को साल 2005 में डायरेक्टर बने और साल 2009-10 तक रहे। अबसभी पक्षकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं और पीडि़त परेशान हैं।

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