सीतापुर: 5 सीट पर निर्दलीय, 2 सीट पर समाजवादी पार्टी व 1 पर राजद ने पाई जीत

डे नाईट न्यूज़ सीतापुर में संपन्न हुए निकाय चुनाव के नतीजों में जिले के कई नेताओं की भविष्य की राजनीति का आईना साफ दिखाई दिया। यहां एक तरफ जहां कई स्थापित नेताओं के लाख प्रयास के बावजूद सीट हाथ से फिसल गई तो वहीं दूसरी तरफ जिले के निकायों में कई जगह नए रिकॉर्ड भी बने , बहरहाल सत्तासीनों के लाख दावों के बावजूद भी इस बार भी सीतापुर में सदर सहित मात्र 3 सीटों पर ही भाजपा प्रत्याशी जीत सके। इनमें सबसे अधिक चर्चा सीतापुर सदर सीट की रही। जहां बेहद कड़े मुकाबले में 28 सालों के बाद कमल खिल सका।

जिले की राजनीति में प्रभावी ब्राह्मण चेहरे के रूप में उभरे मुनीन्द्र अवस्थी ने अपनी बहू नेहा अवस्थी को सदर सीट से जिताने में निर्णायक भूमिका निभाई। मतगणना से ऐन वक्त पहले हाई कोर्ट बेंच लखनऊ द्वारा सदर सीट पर वोट काउंटिंग के दौरान वीडियोग्राफी और अन्य जरूरी निर्देशों के बाद इस सीट पर मतगणना बेहद रोचक हो गई थी। सदर सीट पर इससे पहले आज के सपाई राधेश्याम जायसवाल 1995 में भाजपा के टिकट पर जीते थे। इसके बाद दूसरी रोचक कहानी मिश्रिख-नैमिषारण्य सीट की रही। जहां पर भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव की सियासी फील्डिंग को धता बताते हुए ठाकुर बिरादरी के बब्लू सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी मुन्नी देवी को जिताने में निर्णायक भूमिका निभाई।

इस सीट पर सीएम योगी आदित्यनाथ का भी जादू काम नहीं कर पाया और यहां पर चुनाव प्रचार के बावजूद भी ये सीट भाजपा के हाथों से फिसल गई। यहाँ सियासी विश्लेषकों का ये भी मानना है कि बब्लू सिंह की इस जीत में संगठन-शासन-प्रशासन की ठाकुर लॉबी का बैकडोर वरदहस्त निर्णायक रहा है। इसके बाद अगला नंबर सिधौली सीट का आता है जहां पर 1977 से लगातार निर्दलीय ही जीतते आए थे। यहां पहली बार भाजपा से गंगाराम चुनाव जीते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी गंगाराम और उनकी पत्नी मीना इस सीट पर निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। इसी कड़ी में हरगांव नगर पंचायत भी चर्चा में रही जहां पर राज्यमंत्री सुरेश राही द्वारा चुनाव प्रचार के बाद भी भाजपा प्रत्याशी हरिनाम बाबू मिश्रा बुरी तरह से पराजित हुए। यहां निर्दलीय प्रत्याशी गफ्फार खां ऐसे पहले अध्यक्ष रहे जिन्होंने 35 वर्षों के रिकॉर्ड में लगातार दूसरी बार ये चुनाव जीता।

इसी तरह खैराबाद निकाय में भी भाजपा प्रत्याशी बेबी गुप्ता ने नया कीर्तिमान रच दिया। वर्ष 1910 में गठित इस निकाय सीट पर आजादी के बाद बेबी गुप्ता इस सीट से भाजपा के टिकट पर चुनी जाने वाली पहली महिला अध्यक्ष है। पूर्व सांसद व मौजूदा एमएलसी की प्रतिष्ठा वाली लहरपुर सीट भी इस बार पूर्व सांसद कैसरजहां के हाथ से फिसल गई। यहां कैसरजहां को कभी उन्ही के खेमे के खास रहे निर्दलीय प्रत्याशी हाजी जावेद ने 2,994 मतों से पराजित किया। इसके बाद तंबौर-अहमदाबाद सीट पर लाख प्रयासों के बावजूद समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद मुख्तार अंसारी की पत्नी अजीज जेहरा को मात्र 2742 मत मिले और उन्हें इस सीट पर तीसरे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा। यहां से राजद प्रत्याशी तैयबुन निशा जीती।

इसी तरह बिसवां सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी सीमा राजू जैन का किला ढह गया। यहां उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी पुष्पु जायसवाल ने 500 से अधिक मतों से पराजित किया। शह-मात की इस लड़ाई में महोली सीट पर भी विधायक शशांक त्रिवेदी द्वारा धुआंधार प्रचार के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। यहां पूर्व विधायक अनूप गुप्ता , पूर्व अध्यक्ष दिनेश गुप्ता की बेहतरीन फील्डिंग से सपा प्रत्याशी केतुका ने 900 वोटों से जीत दर्ज की।

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