भूपेंद्र यादव ने जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में भारत की कोशिशों को गिनाया, बोले- हम कर रहे कठिन प्रयास

डे नाईट न्यूज़ मिस्र में चल रही संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता (COP27) में शामिल विभिन्न देश इसके समापन तक कोई ठोस नतीजा निकालने की जद्दोजहद में लगे हैं। इस बीच, मंगलवार को वार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कॉर्बन उत्सर्जन में बेहद कम जिम्मेदारी के बावजूद, जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए भारत के प्रयासों को गिनाया। मिस्र में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय बयान देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अब तक दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन के 4 प्रतिशत से भी कम के लिए जिम्मेदार होने के बावजूद जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए एक कठिन प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या 1.3 बिलियन होने के बावजूद दुनिया के संचयी उत्सर्जन में अब तक हमारा योगदान 4 प्रतिशत से भी कम है। साथ ही हमारा वार्षिक प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत का लगभग एक तिहाई है। इसके बाद भी जलवायु परिवर्तन से लड़ाई के लिए कठिन प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने भारत द्वारा इस संबंध में की जा रही कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा कि हमने  वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में अक्षय ऊर्जा, ई-गतिशीलता, इथेनॉल मिश्रित ईंधन और हरित हाइड्रोजन में दूरगामी नई पहल शुरू की है। 

इस दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत इंटरनेशनल सोलर एलायंस और कोलिशन ऑफ डिजास्टर रेजिलिएशन इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे समाधान-उन्मुख गठबंधनों के माध्यम से मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। गौरतलब है कि इन दोनों को भारत द्वारा लॉन्च और पोषित किया गया था। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में वैश्विक भलाई के लिए सामूहिक कार्रवाई के हमारे लोकाचार का यह प्रमाण है। 

उन्होंने कहा कि भारत 2023 में ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के आदर्श वाक्य के साथ जी20 की अध्यक्षता ग्रहण करेगा। मानवता के लिए सुरक्षित ग्रह की ओर हमारी यात्रा को कोई भी देश अकेले नहीं कर सकता है। यह हमारे मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में समानता और जलवायु न्याय के साथ की जाने वाली सामूहिक यात्रा है। हमें उम्मीद है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई दुनिया को एक परिवार के रूप में एकजुट करेगी।

इस दौरान भूपेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ भारत के एक सुरक्षित ग्रह के दृष्टिकोण के केंद्र में है। उन्होंने कहा कि हम इस ग्रह पृथ्वी के ट्रस्टी हैं। हमें इसे टिकाऊ जीवन शैली के माध्यम से पोषित करना चाहिए जो संसाधनों के उपयोग को अनुकूलित करता है। 

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