सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लम्बित पेंशन को लेकर चर्चा…

डे नाईट न्यूज़ । नगर निगम ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लम्बित पेंशन प्रकरणों का निस्तरण पेंशन अदालत लगाकर किये जाने का नगर निगम एवं जलकल कर्मचारी संघ, लखनऊ ने स्वागत करते हुए अपेक्षा के मुताबिक निस्तारण न होने पर कर्मचारी निराश हुए। नगर निगम में बुधवार को वर्षों के बाद कर्मचारी संगठनों के लगातार दबाव के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी जोकि लम्बे समय से पेंशन प्राप्त करने के लिए दर-दर भटक रहे थे, उनके पेंशन प्रकरण निस्तारण के लिए पेंशन अदालत लगायी गयी। जिसमें नगर निगम प्रशासन की ओर से मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, मुख्य नगर लेखा परीक्षक एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी ही उपस्थित रहे। इस मौके पर कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बहुत ही अफसोस की बात है कि लखनऊ नगर निगम में तैनात तीन अपर नगर आयुक्तों को पेंशन अदालत में आने का समय नहीं मिल सका। जिसके कारण पेंशन अदालत में आये हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को घोर निराशा हुई और कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। पेंशन अदालत में कुल 44 प्रकरण आये जिसमें पेंशन एसीपी बीमा एवं भुगतान से सम्बन्धित थे, जिन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका। संगठन को ऐसा लगता है कि नगर निगम प्रशासन केवल खानापूर्ति कर कर्मचारी की समस्याओं के प्रति उदासीन है,जोकि कतई ठीक नहीं है। संगठन का मानना है कि कर्मचारी अपना पूरा सेवाकाल नगर निगम की सेवा में लगाने के बाद आज पेंशन,फण्ड व अन्य सेवानिवृत्त के बाद अवशेष भुगतान के लिए दर-दर भटक रहा है, और नगर निगम प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। आज कर्मचारियों का सातवें वेतन का अवशेष एरियर भुगतान, समय से वेतन, भत्ते फण्ड आदि का भुगतान समय से नहीं हो पा रहा है। संगठन ने यह भी मांग की है बहुत दिनों से बंद विदाई समारोह भी पुन: प्रारम्भ किया जाए। जिससे सेवानिवृत्ति के दिन ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रकरणों का निस्तारण सम्भव हो सकें। साथ ही पेंशन अदालत को भविष्य में जिम्मेदारी के साथ निस्तारण की स्थिति में आयोजित किया जाए। संगठन क ो मिली जानकारी के मुताबिक जोन-8 की पार्किंग को लेकर कर्मचारियों के खिलाफ बगैर उनका पक्ष जाने एक तरफा कार्रवाई किये जाने की घोर निन्दा करते हुए मांग की है कि कर्मचारियों का अनावश्यक रूप से उत्पीडन बन्द कर उनकी बात सुनते हुए उचित एवं दन्यायसंगत कार्रवाई की जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संगठन कर्मचारियों में बढ़ रहे आक्रोश व किये जा रहे उत्पीड़न आदि के खिलाफ आन्दोलन किये जाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन व उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।

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