डीटीसी के बेड़े में आज शामिल होंगी 150 बसें कुछ लाभ…

डे नाईट न्यूज़ । डीटीसी के बेड़े में आज 150 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो जाएंगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके बाद डीटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़कर 152 हो जाएगी।

सरकार ने दिल्लीवासियों को तीन दिन इलेक्ट्रिक बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा देना का फैसला लिया है। 24 से 26 मई के बीच इन नई बसों में यात्री से किराया नहीं लिया जाएगा। बता दें कि डीटीसी के बेड़े में कुल 300 इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जाना है। इन बसों को अप्रैल तक बेड़े में शामिल किया जाना था लेकिन चार्जिंग स्टेशन तैयार होने व अन्य तकनीकी कारणों से देरी हुई। अब 150 बसों को शामिल किया जा रहा है। आने वाले कुछ महीने के अंदर 148 बसों को डीटीसी के बड़े में शामिल कर लिया जाएगा। दो इलेक्ट्रिक बसों को पहले से बेड़े में शामिल किया जा चुका है, जो सड़कों पर दौड़ रही हैं। अब सरकार नई बसों को बेड़े में शामिल करके इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

ओपेक्स मॉडल पर होगा संचालन

डीटीसी बेड़े में शामिल इलेक्ट्रिक बसों का संचालन ओपेक्स मॉडल पर किया गया है। इसमें 300 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन के लिए मेसर्स जेबीएम ने सबसे कम 68.58 रुपये प्रति किमी की दर से बोली लगाई है। दूसरी कंपनी मेसर्स टाटा मोटर्स है। टेंडर की शर्तों के अनुसार मेसर्स जेबीएम को 200 और टाटा को 100 बसों के संचालन करना है। ऑपरेटर 10 साल तक बसों या बैटरी के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगे। इन बसों के संचालन के लिए बिजली की खपत का खर्च डीटीसी की ओर से किया जाएगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत, चार्जिंग उपकरण और ट्रांसफॉर्मर की लागत भी ऑपरेटर स्वयं वहन करेंगे। एक बार चार्ज होने पर बसें कम से कम 120 किमी की दूरी तय कर सकेंगी। बसों की चार्जिंग के लिए अधिकांश बस डिपो पर इंफ्रास्ट्रक्चर यानी ढांचा तैयार किया गया है।

कोरोना की वजह से हुई देरी

इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी बेड़े में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाना था लेकिन कोरोना के चलते इसमें देरी हुई। योजना के तहत अक्तूबर 2021 में कुल 118 बसें शामिल होनी थीं। इसके बाद नवंबर में 100 और दिसंबर 2021 तक 60 बसें मिलनी थीं। शेष 20 बसों की डिलीवरी जनवरी 2022 तक होनी थी। कोरोना की दूसरी लहर के चलते डिलीवरी में देरी हुई। इसके बाद बसों को 30 अप्रैल तक बेड़े में शामिल किए जाने का लक्ष्य रखा गया था।

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