निगम के विशेष अधिकारी और निगम आयुक्त ने पदभार संभाला…

-विभागों में अध्यक्ष नियुक्त करना होगी पहली जिम्मेदारी

डे नाईट न्यूज़ । दिल्ली नगर निगम के एकीकृत मुख्यालय सिविक सेंटर में रविवार को निगम के विशेष अधिकारी अश्विनी कुमार और निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती ने औपचारिक रूप से पदभार संभाला। मौजूदा समय में दिल्ली में नगर निगम भंग है, महज विशेष अधिकारी और आयुक्त की ही नियुक्ति हुई है। ऐसे में विशेष अधिकारी की नियुक्ति के बाद सबसे पहला काम विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों की नियुक्ति का होगा।

निगम सूत्रों के अनुसार, इसके लिए निगम का एस्टेब्लिशमेंट शेडयूल बनाया जाएगा, जिसमें विभागों के अध्यक्ष और अन्य कर्मियों को अधिसूचित किया जाएगा। साथ ही तीनों निगम का मुख्यालय क्या होगा, यह भी अधिसूचित किया जाना है। कौन सा विभाग कहां होगा, अधिकारी कहां बैठेंगे, इसे भी अधिसूचित किया जाएगा। निगम के अधिकारियों ने बताया कि पहले अस्थायी तौर पर भी विभिन्न विभागों के अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है। फिर धीरे-धीरे इसे स्थायी किया जाएगा। विशेष अधिकारी की मंजूरी से आयुक्त प्रमुख अभियंता, निगम सचिव, जनस्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति की जा सकती है।

विशेष अधिकारी अश्विनी कुमार और निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती द्वारा पदभार संभालने के बाद निगम के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और सभी अधिकारियों-कर्मचारियों से उनका परिचय कराया। अधिकारियों ने विशेष अधिकारी को नगर निगम की कार्य प्रणाली का संक्षिप्त विवरण भी दिया। इसके अतिरिक्त उन्हें नगर निगमों की विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ चुनौतियों से भी अवगत कराया। इस अवसर पर निगम के विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारी उपस्थित रहे। आईएएस अश्विनी कुमार 1992 एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी हैं। वह इससे पूर्व पुडुचेरी में मुख्य सचिव तथा पीडब्ल्यूडी (दिल्ली) में प्रधान सचिव भी रह चुके हैं। वहीं, आईएएस ज्ञानेश भारती 1998 एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी हैं। वह इससे पूर्व दक्षिणी और पूर्वी निगम के आयुक्त के रूप में कार्यरत थे।

निगम के नव नियुक्त विशेष अधिकारी ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर कार्यालय में पदभार ग्रहण किया। सिविक सेंटर के ए-ब्लॉक की तीसरी मंजिल पर बने इस कार्यालय में अभी तक महापौर बैठते थे। निगम के विशेष अधिकारी ने इसी कार्यालय को अपने लिए चुना है।

पांच करोड़ तक की परियोजना मंजूर कर सकेंगे आयुक्त

महापौर और निगम सदन के बजाय अब विशेष अधिकारी काम करेंगे, जिनके पास सर्वाधिक अधिकार होंगे। हालांकि, पांच करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं को निगमायुक्त स्वयं मंजूर कर सकेंगे, लेकिन इससे ज्यादा की लागत वाली परियोजना के लिए विशेष अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। विशेष अधिकारी के पास वही अधिकार होंगे, जो निगम सदन के पास होते हैं। ऐसे में ज्यादातर आदेश विशेष अधिकारी की मंजूरी के बिना लागू नहीं हो पाएंगे। वहीं, प्रतिनियुक्ति पर आए कई अधिकारियों को अपने मूल विभाग में भी जाना होगा।

चुनाव होने तक रहेगी बड़ी जिम्मेदारी

एकीकृत निगम में चुनाव होने तक केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त विशेष अधिकारी पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। चूंकि निगम एक्ट में अधिकतम 250 वार्ड की बात है, तो इसके लिए नए सिरे से परिसीमन होगा, जिसमें अनुसूचित जाति से लेकर महिलाओं के लिए आरक्षित वार्ड का भी निर्धारण किया जाएगा। अब इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन निगम का एक्ट फिलहाल छह माह तक इसे लागू रखने की अनुमति देता है। बता दें कि अब तक तीनों नगर निगम में 272 वार्ड थे।

जल्द हो सकता है कमेटी का गठन

दिल्ली नगर निगम की नियमित कार्यवाही चलाने के लिए जल्द ही कमेटी का गठन किया जा सकता है। इस कमेटी में निगम के उच्च अधिकारियों समेत कुछ जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे आम जनता के कार्यों को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आसानी से किया जा सके। इस कमेटी में कुछ पूर्व महापौर और अन्य वरिष्ठ पार्षदों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

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