गौरव गाथा को गौरव गैलरी में स्थापित किया…

डे नाईट न्यूज़ । सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में आने वाले लोग अब विश्वविद्यालय का इतिहास और गौरव गाथा भी जान सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की पहल पर गौरव गैलरी स्थापित की जाएगी। इस बारे में सोमवार को कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर गौरव गैलरी के माध्यम से संस्थाओं की विशिष्टता एवं सांस्कृतिक परिदृश्य को जनमानस के लिए उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से नवीन पीढ़ी को संस्थाओं के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त होगी। वह उनके व्यक्तित्व के विकास में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय मूलतः ‘शासकीय संस्कृत महाविद्यालय’ था जिसकी स्थापना सन् 1791 में की गई थी। वर्ष 1894 में सरस्वती भवन ग्रंथालय नामक प्रसिद्ध भवन का निर्माण हुआ जिसमें हजारों पाण्डुलिपियां संगृहीत हैं। 22 मार्च 1958 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. सम्पूर्णानन्द के विशेष प्रयत्न से इसे विश्वविद्यालय का स्तर प्रदान किया गया। उस समय इसका नाम ‘वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय’ था। सन् 1974 में इसका नाम बदलकर ‘सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय’ रख दिया गया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि काशी में स्थित 232 वर्षों के ऐतिहासिक परिसर में भारतीय संस्कृति,संस्कार एवं संस्कृत भाषा के त्रिवेणी का प्रवाह समूचे जग को अभिसिंचित किए हुए है। आज इस परिसर की गौरव ज्ञान धारा की धरा के विभिन्न आयाम की जानकारी आज की पीढ़ी को बताने या जानकारी के लिए एक गौरव गैलरी की स्थापना की जाएगी। जिसमें यहाँ के विभिन्न तरह के विभागों,प्राच्य विद्या के उद्देश्य का प्रसार तथा सम्बंधित ग्रंथों,साहित्य तथा श्रेष्ठ ऋषि तुल्य आचार्यों के द्वारा किए गए योगदान एवं उनके व्यक्तित्व की गौरव गाथा बतायी या दिखाई जाएगी। कुलपति ने बताया कि यहां के ऐतिहासिक भवन,विशिष्ट आचार्यों के व्यक्तित्व परिचय,यहां प्रकाशित विभिन्न ग्रंथ,सरस्वती भवन पुस्तकालय में संग्रहीत दुर्लभ पांडुलिपियों के संक्षिप्त परिचय,यहां के कुलपति जो कि अनेकों विशिष्ट योगदान की गाथा,विभिन्न तरह के मन्दिरों के दिव्य प्रकाश की झलकियां तथा सम्पूर्ण देश मे यहाँ से संचालित महाविद्यालयों के स्वरूप,यहां पर आसान पद्धति से अध्ययन-अध्यापन आदि व्यवस्था को गौरव गैलरी में स्थापित किया जाएगा।

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