कितने वाहनों के लिए स्कूल प्रबंधकों को दी नोटिस…

डे नाईट न्यूज़ । नौनिहालों को विद्यालय ले जाने एवं वहां से सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए विद्यालयों के वाहन अभिभावकों के लिए हमेशा चिता का कारण बने रहते हैं। जब तक स्कूल गए बच्चे घर नहीं लौट आते तब तक माता-पिता की चिंता अपने जिगर के टुकड़ों पर लगी रहती है। विद्यालयों को अपनी फीस से मतलब रह गया है। जिस महीने वाहन की फीस जमा नहीं हुई, तुरंत छात्र को नोटिस पकड़ा दी जाती है। फीस के मामले में कोई विद्यालय समझौता नहीं करता हालांकि कुछ विद्यालयों के वाहन सुरक्षा के लिहाज से अपडेट जरूर हैं पर जिले के किसी वाहन पर यह नहीं लिखा कि आन स्कूल डयूटी।

तमाम आटो, ई-रिक्शा, मारुति वैन, जीप से भी बच्चों को ढोया जा रहा है। जो नियमों के हिसाब से एकदम चलन में नहीं हैं। विभाग के भी आंकड़े बताते हैं कि जिले के 125 स्कूली वाहनों की फिटनेस फेल हो चुकी है। वह बगैर फिटनेस के बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं। बहरहाल, गाजियाबाद हादसे के बाद सक्रिय हुए परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधकों पर शिकंजा कस दिया है। वाहनों की फिटनेस फेल होने पर प्रबंधकों को नोटिस जारी की गई है।

गाजियाबाद के मोदीनगर में स्कूल वाहन से सिर बाहर निकालने पर एक बालक की मौत हो गई थी। इस घटना ने अभिभावकों को हिलाकर रख दिया है। ज्यादातर अभिभावकों ने इसको लेकर चिता व्यक्त की। गोपीगंज क्षेत्र में अभी भी मनमानी तरीके से नौनिहालों को वाहनों से ढोया जा रहा है। हादसे को लेकर सक्रिय हुए परिवहन विभाग ने घटना को संज्ञान लिया और मानक के विपरीत चल रहे स्कूल प्रबंधकों पर पर शिकंजा कस दिया है। कार्रवाई के चलते स्कूल प्रबंधक चोरी- छिपे वाहनों का संचालन कर रहे हैं।

परिवहन विभाग के अभिलेखों के अनुसार जिले में 125 स्कूलों के वाहनों का फिटनेस फेल हो चुका है। नियमानुसार बगैर फिटनेस वाहनों का संचालन नहीं किया जा सकता है। सहायक परिवहन अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि प्रबंधकों को नोटिस जारी की गई है। बताया अब शोरूम से बस निकलते समय ही खिड़कियों पर ग्रिल लगा दी जा रही है। बगैर ग्रिल बसों अथवा वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र भी नहीं दिया जा रहा है। नोटिस जारी होने के बाद वाहन मालिक फिटनेस बनवाने के लिए कार्यालय पहुंच रहे हैं। अधिकृत हैं सिर्फ बसें, चल रहे पिकअप

स्कूल वाहनों के रूप में प्रयोग के लिए सिर्फ बसों को ही अधिकृत किया गया है। समय-समय पर जांच के दावे भी किए जाते हैं लेकिन हकीकत यही है कि अप्रशिक्षित हाथों में डग्गामार वाहन (आटोरिक्शा, पिकअप-वैन) से बच्चों को ढोया जा रहा है। वाहन की सुविधा देने के नाम पर स्कूल प्रबंध तंत्रों की मनमानी जारी है। मौके-दर-मौके पर होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान भले ही दो दिन हो हल्ला मचता हो, कार्रवाई को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हो लेकिन उसके बाद फिर से डग्गामार वाहन खुल्लम खुल्ला दौड़ रहे हैं। न तो स्कूल प्रबंधन कोई सबक ले रहे हैं न ही जांच के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारी।

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