महंगाई की मार से कर्ज़दार दबे …

29.6 प्रतिशत रही कर्ज चूक की दर मार्च में संख्या के लिहाज से

डे नाईट न्यूज़ । दैनिक जीवन के बाद महंगाई का असर अब कर्ज के भुगतान पर भी पड़ने लगा है। राष्ट्रीय स्वचालित क्लियरिंग हाउस (एनएसीएच) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कर्ज के भुगतान की किस्त चूक में बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में संख्या के लिहाज से किस्त चूक की दर 29.6 प्रतिशत रही है। फरवरी के मुकाबले इसमें 40 आधार अंकों या 0.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह से मूल्य के आधार पर पिछले महीने किस्त चूक की दर 22.8 प्रतिशत रही है। फरवरी के मुकाबले इसमें 36 आधार अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही है।

विश्लेषकों के अनुसार, नवंबर 2021 में किस्त चूक की दर में तेज सुधार था और यह महामारी के पूर्व स्तर पर पहुंच गया था। आर्थिक गतिविधियों में तेजी के साथ कर्ज लेने वालों की भुगतान क्षमता में सुधार हुआ था। लेकिन मार्च में खाद्य वस्तुओं और तेल की बढ़ती कीमतों से कर्ज लेने वालों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है। इस कारण मार्च में किस्त चूक की दर में इजाफा हुआ है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से जारी डाटा के मुताबिक, मार्च में किस्त के भुगतान के लिए एनएसीएच मंच पर 9.79 करोड़ आवेदन आए। इसमें से 2.89 करोड़ आवेदन पैसों की कमी के कारण भुगतान में डिफॉल्ट रहे। इसी तरह मूल्य के लिहाज से कुल 97,801 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान के आवेदनों में से 22,302 करोड़ रुपये के आवेदन डिफॉल्ट हो गए। हालांकि, एनएसीएच मंच पर किए गए सभी भुगतान आवेदन कर्ज की मासिक किस्त के लिए नहीं होते हैं। इसमें कुछ आवेदन बीमा प्रीमियम और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) की मासिक किस्त भुगतान के भी होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किस्त चूक की दर में मामूली इजाफा हुआ है। यह संभवत: कर्ज लेने वालों पर बढ़े महंगाई के बोझ का असर हो सकता है। करीब चार महीने तक स्थिरता के बाद घरेलू स्तर पर 22 मार्च से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हुई थी। इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव रहा था।

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