30 साल में कांग्रेस में कोई सुनील शर्मा बन सका…!

डे नाईट न्यूज़ | एक दौर में उपनगर ग्वालियर हजीरा क्षेत्र, तानसेन रोड, लोको फोर्ट रोड, सेवा नगर से लेकर गेंडे वाली सड़क पर रहने वाले शिन्दे की छावनी से लेकर कटी घाटी क्षेत्र में प्रद्युम्न सिंह तोमर को सक्रिय नेता व मददगार माना जाता था। पिछले 2 सालों से तोमर की जगह सुनील शर्मा ने उनकी जगह लेकर उन्हें पछाड़ दिया है व तोमर सत्ता की नाव पर चढ़कर अपनी लोकप्रियता भी खो बैठे हैं। कार्यकर्त्ता उनसे मुंह मोड़ते दिखाई दे रहे हैं। रेल्वे कॉलोनी, हजीरा इलाके के तमाम लोग तोमर से नाराज देखे जा रहे हैं। उधर नगर निगम ने हजीरा की सब्जी मण्डी शराब माफिया के होटल की पार्किंग के लिये क्या उजाड़ी इसमें भी तोमर का इशारा कहा जा रहा है।
सुनील शर्मा ने पिछले 10-15 सालों में पहली बार कांग्रेस के बैनर से कोई संघर्ष गरीब सब्जी वालों के लिये किया है। कांग्रेस में कभी भी सड़कों पर संघर्ष की परम्परा नहीं रही है वो तो सिर्फ कामरेड सर्वटे व उनकी कम्युनिष्ट पार्टी, मार्कषवादी मिलके मजूरों के लिये लड़ते रहे हैं। बाकी अब सुनील शर्मा व उनसे जुड़े चन्द दर्जन लोग उनके नेतृत्व में लड़ते देखे गये हैं। कांग्रेस ने एकगुट की सड़कों की इस लड़ाई ने जिले में कांग्रेस को जिंदा कर दिया। उधर सत्ताधारी दल भा.ज.पा. व उसके नये-नये बने नेता प्रद्यम्न सिंह तोमर अपनी लोकप्रियता खो गये व अपने जाति के छोटे से गुट में सिमट कर रहे गये। उनसे मुस्लिम, दलित, पिछड़े व गरीब तब्कों को दूर होते देखा जा रहा है जो अब सुनील शर्मा के साथ हैं।
कांग्रेस एक दौर में ग्वालियर चम्बल संभाग में सिंधिया के आसपास भर रही थी या फिर भगवान सिंह यादव, दिग्विजय सिंह, मावई, के.पी. सिंह, महेन्द्र सिंह व बालेन्दु शुक्ल व दतिया से घनश्याम सिंह आदि के आसपास सिमट कर रह गई थी। आला कमान तो शुरू से ही 1984 में राजा महाराजाओं को कांग्रेस लीज पर देकर सैकड़ों गांधीवादियों को अनाथ कर चुका था। वो तो ग्वालियर में डोंगर सिंह कक्का, राजेन्द्र सिंह व अशोक सिंह कांग्रेस का झंडा उठाते हुए जरूर 30 सालों से घूम रहे हैं व कांग्रेस में अब जाकर 30 सालों बाद कोई सुनील शर्मा निकल सका। 2 साल पहले मुन्नालाल गोयल व सतीश सिकरवार भी कांग्रेस के लोकप्रिय नेता रहे थे। मुन्ना सिंधिया की भेंट चढ़ गये बाकी कोई नेता नहीं बन सका। चन्द्रमोहन नागोरी ने 10-12 साल पहले जरूर कुछ सक्रियता दिखाई थी। महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा भी सक्रिय कांग्रेसी नेता रहे थे पर उन पर सिंधिया की सील गहरी होने से वो कांग्रेसी कम थे सिंधिया भक्त ज्यादा रहे थे फिर भी वो लोकप्रियता में सबसे आगे रहे थे। उन्होंने सांस्कृतिक धरोहरों पर मुझे सांसद के तौर पर लोकसभा में सवाल करने में सहयोग देकर अमर गायक तानसेन व उनके गुरु के मकबरे मोहम्मद गौस के लिये अप्रैल 1987 में लोकसभा में 2 सवाल करके सक्रियता का परिचय दिया था। महेन्द्र सिंह नौकरशाहों को भी कसकर रखते थे। उन्होंने मेरी शिकायत पर 10 सालों तक ग्वालियर के कमिश्नर रहे अजयशंकर को कई बार फटकार लगाई थी जो इस इलाके के कम जनप्रतिनिधि करते दिखाई दिये थे।
ग्वालियर-चम्बल इलाके में कांग्रेस 50 साल सत्ता में रही जिससे उसके नेता सत्ता में पावर के बल पर चलने के आदी रहे हैं। आन्दोलन करना कम्युनिष्टों व भा.ज.पा. वालों का काम माना जाता रहा है। समाजसेवा में विकलांगों के लिये डॉ. उमातुली ने अमर ज्योति स्कूल खोलकर इस इलाके में गत 20 सालों में एक बड़ा प्रभावशाली काम किया है। डॉ. तुली को पद्मश्री भी भारत सरकार ने दिया है। उस दौर में जे.एम.कुरेशी वैलफेयर सचिव भारत सरकार में थे जो एक दौर में 1986 में आई.जी. ग्वालियर भी थे। सुनील शर्मा को सियासतदां के इशारों पर आर्थिक चोट भी प्रशासन देना चाह रहा है जो गलत है। रोजी रोटी के लिये सारे नेता धन्धा तो करते ही हैं।

Back to top button