सिद्धार्थ शंकरने बयां की -चीन की बेजा हरकत किया खुलासा…

डे नाईट न्यूज़ | पिछले माह जब चीन के विदेश मंत्री वांग यी अचानक भारत आए थे, तब लद्दाख के मसले को लेकर पहले एनएसए अजित डोभाल, फिर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उन्हें दो टूक सुनाई थी। एलएसी पर तनाव को लेकर भारत की तरफ से दी गई दलीलों पर उनका जवाब था, कि अब चीन इस मुद्दे को गंभीरता से लेगा और विवाद हल करने पर जोर देगा। हालांकि, वांग की इस बात को राजनीति जानकारों ने गंभीरता से नहीं लिया था। अब चीन की तरफ से जो ताजा हरकत सामने आई है, वह इसी बात पर मुहर लगाती है कि चीन कहने को कुछ भी कहे, मगर वह न तो कल भरोसे के लायक था और न आज है। चीन लद्दाख में अनुचित व आपत्तिजनक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक निजी खुफिया फर्म का दावा है कि उसने बीते आठ माह में कई बार लद्दाख के पास की पावर ग्रिड को निशाना बनाया है। यह फर्म विश्व के सरकारी हैकरों पर नजर रखने वाली सबसे बड़ी खुफिया कंपनियों में शुमार है। उसका कहना है कि चीनी हैकर पावर ग्रिड के सेंटरों के आसपास के बुनियादी ढांचे की जानकारी जुटाना चाह रहे थे। बिजली केंद्रों में चीनी घुसपैठ का उद्देश्य इन जटिल प्रणालियों के बारे में जानकारी हासिल करना भी हो सकता है, ताकि भविष्य में इनके उपयोग की क्षमता विकसित की जा सके। दुनियाभर में साइबर अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले साल अमेरिका में रैनसमवेयर अटैक के कारण लाखों लोग प्रभावित हुए थे। आस्ट्रेलिया में बिजली नेटवर्क पर साइबर अटैक के कारण लाखों लोग बिजली गुल होने की कगार पर पहुंच गए थे। रेकॉर्डेड फ्यूचर का कहना है कि पिछले साल फरवरी में, उसने 10 अलग-अलग भारतीय संगठनों के सिस्टम पर साइबर हमले की सूचना दी थी। दोनों देशों के बीच क्षेत्र में एलएसी को लेकर पहले से लंबा गतिरोध जारी है। रिपोर्ट आने के बाद केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने भी स्वीकार किया है कि चीनी हैकरों ने दो बार हमले का प्रयास किया था। ये हमले उत्तर भारत के केंद्रों पर खासतौर से किए गए। इनमें भी लद्दाख से लगी भारत-चीन सीमा इलाके में स्थित केंद्रों को ज्यादा निशाना बनाया गया। जांच में पाया गया कि भारतीय लोड डिस्पैच केंद्रों से दुनिया भर में फैले चीन के सरकारी कमांड और कंट्रोल सर्वरों को डेटा भेजा जा रहा है। रेकॉर्डेड फ्यूचर ने कहा कि पावर ग्रिड के केंद्रों को निशाना बनाने के अलावा चीन के सरकारी हैकरों ने भारत के आपात प्रतिक्रिया तंत्र पर भी धावा बोला। भारत चीन के बीच 3500 किलोमीटर लंबी सीमा है। इससे सटे कुछ क्षेत्रों को लेकर चीन दावा करता रहा है। दोनों देशों के बीच 1962 में जंग भी हो चुकी है। 2020 में एक बार फिर दोनों देशों में संघर्ष हुआ, जब लद्दाख में चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की। गलवान घाटी में हुए इस संघर्ष में चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, वहीं भारत के भी 20 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद दोनों देशों की सेना बड़ी संख्या में वहां तैनात है। तनाव व सेना हटाने के लिए 15 बार सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है, कुछ क्षेत्रों से सैन्य वापसी हो चुकी है, बाकी को लेकर चर्चा जारी है। गौरतलब है कि जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। इसमें भारत के चौबीस जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद चीन ने तेजी से वहां सैनिक जमा करने शुरू कर दिए और कुछ जगहों पर कब्जा पर भी जमा लिया। इस गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच अब तक 15 दौर की बातचीत हो चुकी है। पर हैरानी की बात यह है कि वार्ता के हर दौर में चीन कुछ न कुछ ऐसा अड़ियल रुख दिखाता रहा है जिससे गतिरोध कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच गतिरोध जिस तरह से खिंचता जा रहा है, वह किसी भी रूप में अच्छा संकेत नहीं है। चीन के रवैये को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर कई मौकों पर अपनी चिंता और नाराजगी का इजहार कर चुके हैं। गलवान घाटी में संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर वार्ताओं के जितने भी दौर चले और उनमें चीन की ओर से जितने आश्वासन दिए गए, उनमें से उसने अपना एक भी वादा नहीं निभाया। ऐसे में उस पर कैसे भरोसा किया जा सकता है! न ही इस बारे में कोई अनुमान लगा पाना संभव है कि दोनों देशों के बीच यह मामला कब तक चलता रहेगा।

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