नगर निगम चुनाव में भाजपा का आरोप-प्रत्यारोप जारी हुआ…

डे नाईट न्यूज़ । दिल्ली में नगर निगम के चुनाव टाले जाने पर दिल्ली विधानसभा सदन में चर्चा चल रही है। सत्ता पक्ष के विधायक भाजपा पर नाराजगी जता रहे हैं। संसद में नगर निगम एक किए जाने का बिल पेश किए जाने के बहुत नाराज हैं। सत्ता पक्ष के विधायक जरनैल सिंह, कुलदीप और प्रहलाद सिंह साहनी ने रखी अपनी बात। कहा कि भाजपा की तानाशाही नही चलने वाली है। कितना भी चुनाव टलवा ले भाजपा नगर निगम में आम आदमी पार्टी ही जीतेगी।

कुलदीप कुमार ने कहा कि वह आठ साल तक नगर निगम में पार्षद रहे हैं। उन्होंने देखा है कि नगर निगम में किस तरह भ्रष्टाचार किया जाता है। जरनैल सिंह ने कहा कि संसद में नगर निगम को एक करने का जो बिल पेश किया गया है। उसमें केवल एक ही जानकारी है कि नगर निगम में 250 वार्ड किए जाएंगे। मगर फंड के बारे में कोई बात नही की गई है।

आम आदमी पार्टी विधायक आतिशी, अरविंद ऋतुराज, मदन लाल ने भी निगमों को एक किए जाने के लिए संसद में बिल पेश किए जाने पर नाराजगी जताई। सभी ने यही दावा किया कि भाजपा चाहें जो भी कर ले, निगम में आप आदमी पार्टी ही आएगी।

वहीं भाजपा विधायक अभय वर्मा और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि आज अगर केंद्र को नगर निगम एक करने के लिए आगे आना पड़ा है। यह स्थिति किस ने कर दी है कि केंद्र को आगे आना पड़ा है। सीधे तौर पर दिल्ली सरकार जिम्मेदार है। कोर्ट तक दिल्ली सरकार को कह चुकी है मगर पैसा नगर निगमों को नही दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि जितना पैसा नगर निगमों को दिए जाने की बात कही गई, वह पैसा भी नही गया।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि देश में आज पहली बार है कि संसद में इसलिये बिल लाया गया है कि नगर निगम के चुनाव को कैसे रोका जाए। आज एक पावरफुल प्रधानमंत्री नगर निगम चुनाव हार जाने से डर रहा है। कहा जा रहा कि नगर निगम में बदलाव किया जा रहा है। मगर हम कह रहे हैं कि नगर निगम में बदलाव करने की कुछ जरूरत नही है। केवल नगर निगम से भाजपा को बाहर कर दो।

आज सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली पार्टी एक छोटी सी आम आदमी पार्टी से डर रही है। आज देश चलाने वाले प्रधानमंत्री को नगर निगम चलाने के लिए बात करनी पड़ रही है। आज जो हो रहा है वह देश और संविधान के लिए ठीक नही है। बिल जो संसद में आया है वह पास भी होगा। मगर जो भी कीजिए। चुनाव करा दीजिए। आप कुछ भी कर लें। अभी चुनाव कराएं, छह माह बाद कराएं या एक साल बाद कराएं। केजरीवाल तो निगम में आएंगे।

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