दिल्ली दंगा : शरजील इमाम के खिलाफ अदालत ने आरोप तय किए…

डे नाईट न्यूज़ । जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम के खिलाफ अदालत ने राजद्रोह समेत अन्य मामलों में आरोप तय कर दिए हैं। इमाम पर दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जनवरी 2020 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एवं उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है।

कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत ने आरोपी शरजील इमाम पर आरोप तय करने से पहले पूछा कि क्या वह अपना अपराध कबूलते हैं। इस पर इमाम की तरफ से आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही गई। अदालत ने इस मामले पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 26 मार्च तय की है। इससे पहले अदालत ने शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि यह मामला गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत है, इसलिए आरोपी जमानत पाने का हकदार नहीं है। अदालत ने आश्वासन दिया कि इस मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाएगी। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष को इस मामले पर प्रति कार्यदिवस सुनवाई का प्रस्ताव दिया है।

क्या है मामला : दिसंबर 2019 में हुए शाहीनबाग विरोध के आयोजकों में से एक शरजील इमाम को दिल्ली पुलिस ने जहानाबाद, बिहार से 2020 में गिरफ्तार किया था। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के मामले में इमाम आरोपी हैं, जिसके कारण दिसंबर 2019 में विश्वविद्यालय के बाहर कथित तौर पर हिंसा हुई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इमाम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भारत सरकार के प्रति घृणा, अवमानना और अप्रसन्नता को भड़काने वाले भाषण दिए। दिल्ली पुलिस ने शरजील के खिलाफ दायर आरोपपत्र में कहा है कि उस पर देशद्रोही भाषण देने और समुदाय के एक खास वर्ग को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप है, जो देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए हानिकारक है।

ये आरोप लगाए गए हैं

-राजद्रोह।

-धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना।

-राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक दावे।

-जनता के लिए हानिकारक बयान।

-गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धारा 13 आदि।

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