ओमिक्रॉन वैरिएंट बना ,डेल्टा वैरिएंट से 6 गुना ताकतवर,, इन लक्षणों को भूल से भी न करे नज़रअंदाज़ !

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कोरोना वायरस का नया वैरिएंट B.1.1.529 (ओमिक्रॉन) दुनिया के सामने एक नई मुसीबत बनकर खड़ा हो गया है. WHO ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है और इसे ”वैरिएंट ऑफ कन्सर्न’ के रूप में सूचीबद्ध किया है. दुनियाभर के एक्सपर्ट्स का दावा है कि ओमिक्रॉन जैसे खतरनाक वैरिएंट पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज थैरेपी का कोई असर नहीं होता है. इस वैरिएंट की ताकत और लक्षणों को लेकर भी बहुत सी नई बातें सामने आई हैं। ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे को देखते हुए ब्रिटेन द्वारा G-7 देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई गई है। बैठक में ओमिक्रॉन के फैलने और उसके रोकथाम के उपायों पर चर्चा की जाएगी। जी-7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ के खतर को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने सभी सीएमओ को राज्य के बाहर से आने वाले सभी यात्रियों के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की डीजी डॉ. तृप्ति भगुना ने इसकी जानकारी दी है। उधर सिंगापुर कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ पर बहुत करीब से नजर रख रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार सिंगापुर ने ‘ओमिक्रॉन’ के प्रसार के जोखिम को कम करने के लिए एहतियाती कदम के रूप में कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आने वाले यात्रियों को क्वारंटीन में ढील देने वाले कदम को पीछे कर लिया है। 
ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे को देखते हुए ब्रिटेन द्वारा G-7 देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई गई है। बैठक में ओमिक्रॉन के फैलने और उसके रोकथाम के उपायों पर चर्चा की जाएगी। जी-7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं।
कनाडा में ओमिक्रॉन वैरिएंट का पहला मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार नाइजीरिया की यात्रा करने वाले दो लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। ओमिक्रॉन वैरिएंट के सामने आने के बाद से कनाडा में कोरोना जांच बढ़ा दी गई है।
ज्यादा संक्रामक बताए गए डेल्टा वैरिएंट पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी का असर दिखाई देता है. जबकि डेल्टा प्लस वैरिएंट पर इस थैरेपी का कोई असर नहीं होता है, जो कि कोविड-19 इंफेक्शन के शुरुआती चरणों में एक चमत्कारी इलाज माना जाता है. डेल्टा प्लस वैरिएंट के बाद ओमिक्रॉन दूसरा ऐसा वैरिएंट है जिस पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
दक्षिण अफ्रीका में पाया गया खतरनाक ओमिक्रॉन वैरिएंट अब तक कई देशों में फैल चुका है. शनिवार को जर्मनी, इटली, बेल्जियम, इजरायल और हॉन्गकॉन्ग में इसके नए मामले दर्ज किए गए. ब्रिटेन में भी ओमिक्रॉन के दो मामले सामने आने के बाद मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और टेस्टिंग को लेकर सरकार हरकत में आ गई है. अमेरिका में सरकार के शीर्ष इंफेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट डॉ. एंथोनी फाउची ने कहा कि इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं होगी अगर अमेरिका में भी ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले देखने को मिल जाएं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ओमिक्रॉन में वायरस का अब तक का सबसे ज्यादा म्यूटेट वर्जन देखा गया है. इतने सारे म्यूटेशन इससे पहले कभी भी एक ही वायरस में नहीं देखे गए हैं. यही वजह है कि नए वैरिएंट को लेकर वैज्ञानिक चिंतित हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन पिछले बीटा और डेल्टा वेरिएंट से आनुवांशिक रूप से अलग है, लेकिन इस बात की अभी कोई जानकारी नहीं है कि ये जेनेटिक बदलाव इसे ज्यादा खतरनाक बनाते हैं या नहीं।

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