कृषि कानून वापसी पर बोले हेमंत सोरेन….

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सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि पहले गला दबाते हैं, फिर गले लगाते हैं. किसान आंदोलन में मारे गए लोगों को 5 – 5 करोड़ रुपये मुआवजा दी जाए. इसके साथ ही मृतक के परिजनों को नौकरी और खेती नहीं कर पाने वाले किसानों को 10 – 10 लाख दिए जाएं. आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमा भी केंद्र सरकार वापस ले. किसानों का हितैषी बनने का ढोंग नहीं चलेगा
विवादित कृषि कानून पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पीएम मोदी के इस बड़े ऐलान पर विभिन्न वर्गों से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कृषि कानून को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस फैसले को हास्यास्पद करार दिया है. हेमंत सोरेन ने कहा कि भविष्य की राजनीति और चुनाव को देख कर निर्णय लिया गया है.

उधर कृषि कानून वापसी को लेकर जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने कहा, मोदी का घमंड हारा राहुल की मेहनत जीती. सभी शाहिद किसान भाइयों को मेरी श्रधांजलि. आंदोलनकारी किसानों को जीत की बधाई. दुनिया झुकती है, बस झुकाने वाले चाहिए
बता दें कि इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि कानून वापस लिए जाने के ऐलान पर कहा कि यह प्रधानमंत्री जी का निर्णय था और यह तीनों कानून संसद से पास हुआ था. ये निर्णय उन्हीं का है इसलिए इस पर कोई प्रतिक्रिया हो नहीं सकती. उन्होंने सबकुछ स्पष्ट किया है.गौरतलब है कि इससे पहले पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘किसानों की स्थिति सुधारने के महाअभियान में तीन कृषि कानून लाए गए थे. मकसद ये था कि छोटे किसानों को और ताकत मिले और उन्हें उपज का सही दाम मिले. बरसों से ये मांग, देश के कृषि विशेषज्ञ, संगठन और वैज्ञानिक कर रहे थे. पहले भी कई सरकारों ने मंथन किया था. इस बार भी संसद में चर्चा हुई और कानून लाएंगे. देश के कोने-कोने में कोटि-कोटि किसान संगठनों ने स्वागत किया और समर्थन किया. मैं आज उन सभी का समर्थन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
पीएम ने कहा कि ‘हमारी सरकार खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए गांव-गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए पूरी सत्य निष्ठा से हमारी सरकार ये कानून लेकर आई है. हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए भले ही किसानों का एक वर्ग ही विरोध कर रहा था. वैज्ञानिकों, कृषि कानून विशेषज्ञों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया. हमने किसानों की बातों और उनके तर्कों को समझने में भी कोई कोर कसर नहीं बाकी रखा. कानून के जिन प्रावधानों पर उन्हें ऐतराज था, उस पर भी बात की. मैं आज देशवासियों से क्षमा मांगते हुए कहना चाहता हूं कि हम कुछ किसानों को समझा नहीं पाए.’

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