जनपद संत कबीर नगर ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की मनमानी रवैया से प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित है पात्र। प्लास्टिक की पन्नी डालकर जीवन यापन करने के लिए मजबूर है पात्र महिला

डे नाइट न्यूज़ ब्यूरो चीफ संजय कुमार यादव की रिपोर्ट

जनपद संत कबीर नगर दिनांक 28/09/2021

प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रता की सूची में नाम होने के बावजूद भी ग्राम सचिव के मेहरबानी से प्लास्टिक डाल कर जीवन काट रही हैं पीड़ित महिला।

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पीड़ित महिला लगा रही है जिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर। कार्रवाई के नाम पर प्रशासन मौन धारण किए हुए हैं

जनपद संत कबीर नगर आपको बताते चलें कि मामला जनपद संत कबीर नगर के हैसर विकास खंड के अंतर्गत ग्राम हकीमपुर का है जहां की महिला नील कमला पत्नी त्रिलोकीनाथ का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हमारा नाम पात्रता सूची में क्रम संख्या 73 पर अंकित है ऑनलाइन आवेदन संख्या 126961333 पर अंकित हैं पात्रता सूची में प्रार्थिनी का नाम होते हुए भी वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राणा सिंह ने मुझसे कहा कि तुम चुनाव में मुझे वोट नहीं दिया इसलिए तुम्हें आवास का लाभ नहीं दिया जाएगा और अगर तुम्हें आवास का लाभ लेना है तब सबसे पहले ₹20000 एडवांस देना होगा तब तुझे प्रधानमंत्री आवास का लाभ योजना मिलेगा आपको बताते चलें कि प्रार्थी निहायत ही गरीब और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली महिला है किसी तरह मजदूरी करके अपना और अपने बच्चों का भरत पोषण करती हैं प्रार्थी के पास झोपड़ी के अलावा कोई पक्का मकान नहीं है टूटी फूटी झोपड़ी पर प्लास्टिक की पन्नी डालकर इस बरसात के मौसम में जीवन यापन कर रही है प्रार्थी बताया कि मैंने झोपड़ी का फोटो खींचकर आवास के लिए ऑनलाइन आवेदन किया पात्रता सूची में दर्ज है लेकिन ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के द्वारा चुनावी रंजिश को लेकर हमें आवास देने से बिल्कुल इनकार किया जा रहा है जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पानी से मैं पूरी तरह से वंचित हो जा रही हैं पीड़ित महिला ने ग्राम सचिव को भी कटघरे में खड़ा किया महिला का कहना था कि ग्राम सचिव हम से पैसे की मांग करते हैं और पैसा ना होने के कारण हमारा नाम है फिर भी हमें प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित कर रहे हैं जब ब्लॉक से हमारा कोई निस्तारण नहीं हो सका तो मजबूर होकर के आज मुझे जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर शिकायती पत्र देना पड़ रहा है अब देखना यह है कि क्या जिलाधिकारी हमारे मामले को संज्ञान में लेकर हम गरीब की फरियाद सुनते हैं या हमारा शिकायती पत्र ठंडे बस्ते में डालकर कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है??

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