ट्रंप के एडवाइजर ने रूस और यूक्रेन के बीच के युद्ध को मोदी का युद्ध बता दिया। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने रूस यूक्रेन जंग को मोदी का युद्ध बताते हुए कहा कि शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है।
अमेरिका एक तरफ भारत को यूक्रेन में युद्ध का सीधा जिम्मेदार बता रहा है। कह रहा है कि शांति का रास्ता दिल्ली से होकर गुजरता है। वहीं अब अमेरिका के सुर कुछ ढीले भी पड़ रहे हैं। 50 प्रतिशत का टैरिफ 27 लागू हो चुका है। अब अमेरिका में ट्रंप के खासमखास एडवाइजर और रोजाना बयान जारी करके भारत को युद्ध के लिए जिम्मेदार, यूक्रेनियों की मौत के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। वो अब कह रहे हैं कि 24 घंटे में 25 % टैरिफ कम हो सकता है, बस रूस से तेल खरीदना भारत बंद कर दे। लेकिन इसके साथ ही वो कह रहे हैं कि भारत बड़ा घमंडी भी है। ट्रंप के एडवाइजर ने रूस और यूक्रेन के बीच के युद्ध को मोदी का युद्ध बता दिया।
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने रूस यूक्रेन जंग को मोदी का युद्ध बताते हुए कहा कि शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है।नवारो ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदता है। रूस उसी पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ करता है। नवारो ने कहा कि इसी वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था गड़बड़ा रही है। नवारो ने तो यहां तक कह दिया कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है तो तुरंत अमेरिकी टैरिफ में 25 फीसदी की कटौती हो सकती है। भारत जो कर रहा है, उससे अमेरिका में हर कोई हार रहा है। उपभोक्ता, व्यवसाय और हर कोई हार रहा है, और कामगार भी हार रहे हैं क्योंकि भारत के ऊंचे टैरिफ की वजह से हमारी नौकरियां, कारखाने, आमदनी और बढ़ी हुई मजदूरी खत्म हो रही है। और फिर करदाताओं को भी हार का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि हमें मोदी के युद्ध के लिए धन मिल रहा है।
यह टिप्पणी बुधवार को ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के प्रभावी होने के बाद आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस कदम को नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद से जोड़ा है। इस टैरिफ ने इस महीने की शुरुआत में लगाए गए मौजूदा 25 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क को दोगुना कर दिया है। नवारो ने दावा किया कि मास्को ने नई दिल्ली द्वारा ‘छूट वाले’ कच्चे तेल की खरीद से प्राप्त धन का उपयोग अपनी युद्ध मशीनरी के वित्तपोषण के लिए किया। उन्होंने तर्क दिया कि बदले में, कीव से हथियारों और धन के लिए अनुरोधों के रूप में अमेरिकी संसाधनों पर कर लगाया गया है। नवारो ने कहा कि भारत जो कर रहा है, उससे अमेरिका में हर कोई हार रहा है। उपभोक्ता, व्यवसाय और हर चीज़ हार रही है, और मज़दूर भी हार रहे हैं क्योंकि भारत के ऊँचे टैरिफ़ की वजह से हमारी नौकरियाँ, कारखाने, आमदनी और ऊँची मज़दूरी छिन रही है। और फिर करदाताओं का भी नुकसान हो रहा है क्योंकि हमें मोदी के युद्ध का वित्तपोषण करना पड़ रहा है।
वारो ने कहा कि यदि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर दे और युद्ध मशीन को चलाने में मदद करे तो उसे कल 25 प्रतिशत की छूट मिल सकती है। भारत पर लगाया गया 50 प्रतिशत शुल्क, अमेरिका द्वारा किसी भी एशियाई देश पर लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा पारस्परिक शुल्क है। इससे भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजार, अमेरिका को भेजे जाने वाले 55 प्रतिशत से ज़्यादा भारतीय सामान पर असर पड़ेगा। हालाँकि इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाइयों जैसे कई प्रमुख उत्पादों को फिलहाल छूट दी गई है, लेकिन इन शुल्कों का असर कपड़ा और आभूषण सहित कई श्रम-प्रधान उद्योगों पर पड़ा है।
