अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह कार्यक्रम आयोजन |

डे नाईट न्यूज़ । महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल द्वारा “एक स्थायी कल के लिए आज लैंगिक समानता” विषय पर पूरे सप्ताह विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

के तहत 7 से 12 मार्च तक एस.एस.बी. बल मुख्यालय, आर. के पुरम, नई दिल्ली में “जेंडर संवेदीकरण” पर एक 6 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमे सशस्त्र सीमा बल की विभिन्न इकाइयों से 50 अधिकारी सम्मिलित हुए। कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान संगठनों में महिलाओं और उनके अधिकारों का समर्थन करने वाले सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करने के लक्ष्य को पूरा करना तथा एस. एस. बी के प्रतिभागियों को लैंगिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना था।

पूरी कार्यशाला को 06 मॉड्यूल (51अवधियों) में विभाजित किया गया तथा कार्यशाला के दौरान व्याख्यान, बातचीत, प्रायोगिक सीख, अनुभव साझा करने, भूमिका निभाने, केस स्टडी, प्रश्नोत्तरी और केंद्रित समूह चर्चा के माध्यम से लिंग संवेदीकरण के सभी आयामों को शामिल किया गया तथा उनपर चर्चा की गई।

कार्यशाला के दौरान एम्स, नई दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जे.एन.यू. आई.आई.टी दिल्ली, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान, भारतीय विधि संस्थान, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के 16 फैकल्टी मेंबर्स और दिल्ली न्यायिक सेवाओं के 8 अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा “लैंगिक संवेदीकरण” के विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।

छह दिवसीय कार्यशाला का समापन शनिवार को एस.एस. बी. बल मुख्यालय, आर के पुरम नई दिल्ली हुआ। समापन समारोह के दौरान जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति, गीता मित्तल मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुईं। उन्होंने एक सफल कार्यशाला आयोजित करने के लिए एस. एस. बी. की प्रशंसा की। अपने संबोधन में उन्होंने सभी प्रतिभागियों से दैनिक जीवन तथा अपने पेशेवर जीवन में कड़ी मेहनत, ईमानदारी और विनम्रता जैसे गुणों को विकसित करने का आह्वान किया। तत्पश्चात उन्होंने सभी प्रतिभागियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं। समापन समारोह में लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्राचार्य डा. प्रत्यूष वत्सला विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुईं।

इस अवसर पर एसएसबी के महानिदेशक संजय अरोड़ा ने सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला की सभी शिक्षाओं को जमीनी तथा सामाजिक स्तर तक पहुंचाने को कहा तथा प्रत्येक बलकर्मी को लैंगिक संवेदीकरण से संबंधित मुद्दों के साथ संवेदनशील बनाने के लिए कहा।

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