गाजीपुर में भाजपा की लुटिया गयी डूब, आखिर कहाँ से हुई चूक,हार का कौन रहा जिम्मेदार !

गाजीपुर।उत्तर प्रदेश में एक बार फिर जनता ने योगी सरकार में विश्वास जताते हुए सत्ता में वापसी करा दी है। जहाँ भाजपा 274 सीट जितने में कामयाब रही तो वही सपा-गठबंधन 125 सीटों पर ही सिमट गया।वही गाजीपुर में भाजपा को काफी नुकसान झेलना पड़ा,सपा-गठबंधन ने यहाँ सातो सीटों पर कब्जा कर लिया।भाजपा के लिए गाजीपुर के ये नतीजे किसी जबरदस्त झटके से कम नही है।बीजेपी कार्यकर्ताओं को सूझ ही नही रहा है कि आखिर यह हो क्या गया।तरह तरह के कयास लगाए जा रहे है। कोई संगठन पर सवाल खड़ा कर है तो कोई जातिगत फैक्टर का असर बता रहा है।सातो सीटो पर मिली हार से बीजेपी कार्यकर्ताओं में खलबली मची हुई है,कुछ ने तो(नाम न छापने की शर्त पर) यहां तक कह दिया की अब जिले में संगठन को ही बदल देना चाहिए और हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।क्यो कि हार के लिए संगठन ही मुख्य जिम्मेदार है।कयास लगाए जा रहे थे कि पूर्वांचल खासकर गाजीपुर में भाजपा की इस्तिथि खराब रहेगी लेकिन इतनी खराब रहेगी कोई उम्मीद नही किया था।इसी का नतीजा रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,मुख्यमंत्री योगिआदित्यनाथ,गृहमंत्री अमितशाह,स्मृति ईरानी,मनोज तिवारी जैसे दिग्गजो की सभाएं,रोडशो आयोजित गाजीपुर में किये गए वाबजूद इसके बीजेपी की हार किसी को पच नही रही।यही नही जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी बीजेपी प्रत्याशियों को जिताने के लिए जिले भर के मंदिरों का दर्शन पूजन तक कर डाला वही विपक्षियों ने उनके गाजीपुर दौरे को लेकर सवाल भी खड़ा कर दिया बावजूद इसके भाजपा एक भी सीट जीतने में कामयाब नही हो सकी।
वही सपा की इस जीत पर कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है हालांकि प्रदेश में अखिलेश के मुख्यमंत्री न बन पाने का मलाल भी है।जमानिया से ओमप्रकाश सिंह,मोहम्दाबाद से मन्नू अंसारी,जहूराबाद से सुभासपा अध्यक्ष व प्रत्याशी ओमप्रकाश राजभर,जंगीपुर से वीरेंद्र यादव,जखनिया से बेदी राम,सैदपुर से युवा अंकित भारती ,सदर से जयकिशन साहू ने अपने निकटवर्ती भाजपा प्रत्याशियों को हराने में कामयाब रहे है।सबसे हैरान करने वाला नतीजा रहा ओमप्रकाश राजभर का जहा ओपी राजभर ने बीजेपी के कालीचरन राजभर को 45632 रिकार्ड मतों से हरा दिया।जिले में मिली इन जीतो से सपा कार्यकर्ता गदगद है कि उनकी मेहनत रंग लाई वही कुछ का मानना है कि यह जीत 2024 लोकसभा चुनावों में टॉनिक का काम करेंगी।

Back to top button