हमीदिया कैम्पस का बड़ा हादसा ; 7 बच्चो की मौत , मुख्यमंत्री ने कहा ,आरोपियों को बक्शा नहीं जायेगा।

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सोमवार रात 9 बजे भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल में आग लग गई थी। आग अस्पताल की तीसरी मंजिल पर चाइल्ड वार्ड के SNCU में लगी, जहां 40 बच्चे भर्ती थे। माना जा रहा है कि बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट से हादसा हुआ और पीडियाट्रिक वेंटिलेटर ने आग पकड़ ली। फिर ये आग उस वॉर्मर तक पहुंच गई, जिसमें बच्चों को रखा गया था। कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही पूरे वार्ड में धुआं भर गया। हादसे में सात बच्चों की मौत हो गई।

हमीदिया कैम्पस के कमला नेहरू हॉस्पिटल में आग लगने से मारे गए बच्चों के परिजन ने घटना के पीछे बड़ी साजिश होने का शक जताया है। उनका कहना है कि हादसे से 5 मिनट पहले ही वार्ड में नर्स और वार्ड बॉय के बीच झगड़ा हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे को धमकियां दी थीं। मंगलवार सुबह मृत बच्चों का शव लेने पहुंचे परिजन ने DNA जांच की मांग भी की है।

बिल्डिंग के सामने रात से जारी चीख-पुकार सुबह तक सिसकियों में बदल चुकी है। परिजन ने यहां रात ठंड में ठिठुरते हुए बिताई। सुबह होते ही वे बच्चों से मिलने पहुंचे, लेकिन बिल्डिंग गेट पर पुलिस और प्राइवेट सिक्योरिटी तैनात कर दी गई। उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। सुबह 7.30 बजे परिजन और सुरक्षाकर्मियों के बीच नोकझोंक भी हो गई। हंगामा बढ़ने पर परिजन को अंदर जाने दिया गया।

परिजन का आरोप है कि सरकार और हॉस्पिटल मैनेजमेंट मौत के आंकड़ों को छिपा रहा है। सिर्फ 4 बच्चों की मौत नहीं हुई है। आंकड़ा इससे ज्यादा है। तभी तो उन्हें उनके बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। मृत हुए बच्चों को लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है कि वे किसके हैं। सिर्फ मौखिक रूप से मौत की जानकारी दे दी गई है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हमीदिया हादसे के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पोस्टमार्टम के लिए 7 बच्चों के शव लाए गए हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चार बच्चों की मौत हुई है।  
हमीदिया कैम्पस में कमला नेहरू गैस राहत हॉस्पिटल है। इसमें ही सोमवार रात करीब 9 बजे आग लगी थी। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बच्चा वार्ड के एसएनसीयू में 40 बच्चे भर्ती थे, जहां आग का सबसे अधिक नुकसान हुआ है। सूत्रों का कहना है कि हादसा शॉर्ट सर्किट की वजह से और पीडियाट्रिक वेंटिलेटर ने आग पकड़ ली। सूत्रों का कहना है कि पोस्टमार्टम के लिए 7 बच्चों के शव लाए गए हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चार बच्चों की मौत हुई है। एक दर्जन से अधिक नवजात झुलस गए हैं। इनमें से कुछ की हालत गंभीर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हादसे से यह साफ हो गया है कि फायर सेफ्टी का ऑडिट बेहद जरूरी है। सरकारी ही नहीं बल्कि प्राइवेट अस्पतालों में भी फायर सेफ्टी को लेकर सख्ती बरती जाएगी।
इससे पहले चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मंगलवार सुबह अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने दावा किया था कि 36 बच्चों का इलाज चल रहा है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि 4-4 परिजनों को अंदर जाकर बच्चों से मिलने की अनुमति दी जा रही है।
इससे पहले हादसे की जांच कर रहे अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान और डीन अस्पताल पहुंचे। परिजनों का दावा है कि रात ढाई बजे से मंगलवार सुबह तक अस्पताल प्रबंधन ने कई लोगों को बच्चों की मौत की खबर दी है। ऐसे में आंकड़ा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना ये है की सरकार क्या कदम उठती है ?

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