पंचायत चुनाव 2021 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।

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NIRAJ KUMAR (Bureau Chief)

एक ओर प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं से जनसम्पर्क कर विकास की लंबी – लंबी वादे की जा रही है तो वही मतदाताओं द्वारा प्रत्याशियों के सामने कुछ बोलने से अभी भी परहेज बरता जा रहा है।

मालूम हो कि स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने, गांव के लोगों की भागीदारी बढ़ाने ,कल्याणकारी योजनाओं में तेजी लाने, स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे विवादों को आपस में सुलझा ने आदि के उद्देश्य को लेकर बिहार पंचायती राज अधिनियम आजादी मिलने के साथ ही वर्ष 1947 में लागू हुआ ।
भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की पहचान समाज में हमारी गहन सूझबूझ के आधार पर व्यवस्था निर्माण करने की क्षमता की परिचायक समाज में स्वाभाविक रूप से समाहित स्वाबलंबन आत्मनिर्भर एवं संपूर्ण स्वतंत्रता के प्रति समर्पित एवं लगाव का द्योतक ही ग्राम पंचायत का उद्देश्य है
उक्त अधिनियम को वर्ष 1948 में पूरे राज्य में लागू किया गया ।
जानकारी अनुसार इस अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत का कार्यकाल 3 वर्ष ही रखा गया था वहीं उम्मीदवारों की उम्र सीमा कम से कम 25 वर्ष तो मतदाताओं की उम्र सीमा 21 वर्ष निर्धारित की गई थी ।पुनः इसमें संशोधन के पश्चात कार्यकाल बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया और मतदाताओं की उम्र सीमा घटाकर18 एव उम्मीदवारों के लिए 21 साल तय कर दिया गया। , जो वर्तमान में आज भी लागू है ।

पंचायत चुनाव की बात करें तो बिहार में प्रथम पंचायत चुनाव वर्ष 1952 से प्रारंभ हुआ था समय बीतता गया परिवर्तन आता गया त्रिस्तरीय पंचायत राज का प्रारंभ हुआ जो कि वर्ष 1961 में लागू हुआ और सर्वप्रथम भागलपुर में 1964 में त्रिस्तरीय पंचायतों का गठन हुआ।

वर्ष 2021 के अप्रैल माह में होने वाले चुनाव कोरोना महामारी के कारण टलने के बाद लोगों के द्वारा संभावित तिथि को लेकर कई माह पूर्व से ही अटकलें लगाई जा रही थी लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा राघोपुर प्रखंड क्षेत्र में तीसरे चरण में 20 अक्टूबर को मतदान होना तय होते ही पंचायत के चौक- चौराहे से लेकर घर-घर जीत हार की चुनावी गणित में गुणा भाग कर मुखिया बनाने व बनने की दौड़ शुरू हो चुकी है ।मतदाताओं द्वारा भिन्न-भिन्न तरह की जातीय समीकरण तो विकास में रुचि रखने वाले आदि तरह की बातें कर संबंधित प्रत्याशियों की जीत हार की अटकलें लगाने की प्रक्रिया भी जारी है । चुनाव की हवा क्षेत्र के गली- गली में शुरू हो चुकी है क्षेत्र में प्रत्याशियों द्वारा जनसंपर्क तेज कर मतदाताओं की नब्ज टटोली जा रही है।

जब राघोपुर एवम प्रतापगंज एक ही प्रखंड था और कुल 29 पंचायत के लिए मुखिया प्रत्यासी सामने आते थे वह दौड़ वर्ष 1994 से पूर्व का था ।
इसी कडी में 80 के दशक के प्रखंड के बोराह पंचायत के पूर्व मुखिया करजाईन थाना क्षेत्र अंतर्गत गौसपुर निवासी देव नारायण देव से प्रभात खबर की विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनका जन्म 1942 में हुआ था । सहरसा कॉलेज सहरसा से विज्ञान संकाय में इंटर पास कर रसायन शास्त्र में विशेष अभिरुचि रखने वाले श्री देव आगे की पढ़ाई करने दीनदयाल कॉलेज मुजफ्फरपुर चले गए, परिवारिक समस्या के कारण उन्हें लौटना पड़ा और लोगों के विशेष आग्रह पर वर्ष 1970 में पहली बार पंचायत चुनाव में मुखिया प्रत्याशी के रूप में लोगों के बीच 2 प्रत्याशियों में एक बनकर सामने आए । जिसमें 13 वोटों से उनकी हार हो गई थी । पुनः वर्ष 1978 में इनकी जीत हुई एवं तब से लगातार वर्ष 2011 तक लोगों की सेवा एवं पंचायत के विकास कार्य में लगे रहे । वर्ष 2011 के बाद स्वास्थ्य में गिरावट आने के कारण चुनावी मैदान में नहीं उतर पाए। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1978 के बाद 23 वर्ष बाद 2001 में ही पंचायत चुनाव हुआ।
पूर्व में होने वाले पंचायत चुनाव के बारे में बताया कि लोगों में प्रत्याशी को चुनने की भावनाएं अलग होती थी जो कि वर्तमान समय से बिल्कुल अलग था । लोग ऐसे व्यक्ति जो लोगों के बीच का मतभेद दूर करने ,गांव की रक्षा ,गांव का विकास ,समुदाय परक समाधान निकालने जो सबको मान्य हो दूसरों की रक्षा करने में हमेशा आगे आने वाला हो ऐसे व्यक्तित्व वाले लोगों को आगे लाते थे । लेकिन वर्तमान समय बिल्कुल बदल चुका है कई गुणा अधिक प्रत्याशी चुनावी मैदान में छलांग लगाते हैं । मतदाताओं में भी कई तरह के परिवर्तन आए हैं । जबकि इस विषय पर विशेष चर्चा करते हुए श्री देव ने बताया कि पूर्व में सरकार के द्वारा मुखिया के लिए कोई विकास के फण्ड भी नहीं आता था बहुत ज्यादा विकास कार्य भी नहीं हो पाता था इसके बावजूद भी समाज के कल्याणार्थ हेतु मुखिया के द्वारा हर संभव कोशिश की जाती थी । समाज भी ऐसे चेहरे को सामने लाना पसंद करते थे जो सामाजिक सद्भावना में अग्रसर हो लेकिन वर्तमान समय में मतदाताओं में तत्कालिक स्वयं के फायदे को अधिक बताया है । चुनावी मैदान में प्रत्याशियों की भी होड़ मची रहती है जो पूर्व में नहीं था ।

अगर दूसरी तरफ देखे तो लोगों में पहली बार पंचायत चुनाव में ईवीएम मशीन एवं वैलेट पेपर पर एक साथ मतदान को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ी है तो प्रथम बार 18 वर्ष पूरा कर मतदाता की सूची में आने वाले युवाओं में पंचायत सरकार के निर्माण करने को लेकर अलग ही सोच बनी है। युवाओं द्वारा चर्चा का विषय बना है कि ऐसे प्रत्याशी का चयन करूंगा जो जातिवाद से उठकर विकास के कार्य में अग्रसर हो धरातल पर विकास के कार्य करें सभी योजनाओं का लाभ सरलता पूर्वक संबंधित लोगों तक पहुंचाने में दिलचस्पी रखता हो। पंचायत के विकास करने की क्षमता रखने वाला हो आदि कई तरह की बातें की जा रही है। तो प्रत्याशियों द्वारा भी कई तरह की वादा लोगों के बीच किया जा रहा है ।

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